Wednesday, September 24, 2008

दयाल तू ही मेरा जीवन धरे

दयाल तू ही मेरा जीवन धरे,
(तेरी) अमृतवाणी वर्द्धन करे ।।
दयाल तू ही ....
दर-दर भटका चैन न पाया,
माया बंधन में सर चकराया।
दरद न जाने कोई, नाहीं पहचाने कोई,
(अब) तेरे चरण में आनन पड़े॥
दयाल तू ही ....
सबसे प्यारा तुम सहारा,
तुम बिना तो जग अँधियारा।
भेद न जाने कोई , सुरत न जाने कोई
(अब) तेरे शरण में जीवन तरे ॥
दयाल तू ही ....
जगत के स्वामी अन्तर्यामी,
दरश दिखाओ प्रभु परमनामी।
थामा डोर सोई, रहे न भरम कोई
(अब) तुम जगत के दुःख हरे।।

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